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टंग - ट्विस्टर

                       टंग- ट्विस्टर 

1.      चार चार चार छाते, 
         चार अचार घाटे,
         चाट - चाहकर चार छाते, 
         चार चुराकर भागे।

2.    तोला राम ताला तोल के तेल में तुल गया, 
        तुला हुआ तोला ताले के तले हुए तेल में तला गया।
      
                                               हरिश प्रजापत 
                                                कक्षा - 8


1.      जोजो को खोजो, खोजो जोजो को
         जो जोजो को ना खोजो, तो खो जाए जोजो

2.   चार कचरा कच्चे चाचा, चार  कचरा पक्के,
       पक्की कच्चे चाचा कच्ची कचरा पक्के।

                                   पार्थ राज कटारिया
                                      कक्षा - 8

समझदार मंत्री मूर्ख राजा

                  
                 चतुर मंत्री मूर्ख राजा 

बहुत समय पहले की बात है एक मूर्ख राजा था। वह युद्ध इसलिए जीतता था क्योंकि उसका मंत्री बहुत चालाक था। एक बार की बात है राजा सैर पर निकला था। उसने देखा की उसके राज्य का पानी दूसरे राज्य में जा रहा है। तब उसने हुक्म दिया कि दूसरा राज्य को पानी नही दिया जायेगा । वहां बांध बना दिया जाये। तब दो महीने में बांध बनकर तैयार हो गया मंत्री ने बहुत समझाया ऐसा ना करे। इससे हमारा ही नुकसान है पर राजा नही माना उसने बांध बनवा दिया और  सारा पानी नगर में आ गया। तब मंत्री ने एक योजना बनाई।  उसने दरबान को कहा कि हर पहर से तीन गुना घण्टी बजाए।  योजना के अनुसार रात हुई तब दरबान प्रत्येक पहर तीन गुना घण्टी बजाने लगा। जब रात के 3. 00 बजे धे तब दरबान ने 6. 00 बजे की घण्टी बजाई। घण्टी की ध्वनि सुनकर राजा उठा और देखा कि आकाश में अंधेरा था। सूरज अभी तक आकाश में नही निकला था। मूर्ख राजा ने सोचा, हमने पङौसी राजा का पानी रोक दिया इसलिए उन्होंन हमारा सूरज छूपा लिया। इस घटना से राजा को पका  विश्वास हो गया और मंत्री को बुलाकर कहा कि 'आप कोई तरकीब निकालो जिससे पङौसी राजा हमारा सूरज हमें लौटा दें।' राजा कि यह बात सुनकर मंत्री को समझ आ गया कि राजा को अपनी गलती का एहसास हो गया है। मंत्री ने बांध खुलवा दिया। प्रकृति के अनुसार सूर्य उदय हो गया। राजा आकाश में उदय होते सूरज को देखकर खुश हुआ और    जोर - जोर से चिल्लाने लगा कि पङौसी राजा ने हमारा सूरज लौटा दिया है। सभी के चहरों पर मंद - मंद मुस्कान थी। 

शिक्षा :- जब खुद में बुद्धी ना हो तो समझदार व्यक्ति की बात मान लेनी चाहिए। 
     
                             सुनिल सिंघल 
                              कक्षा - 8

" सच का पाठ"


         " सच का पाठ "
 
      महात्म गांधी बचपन से ही सत्य और अहिंसा का पालन करते थे। कभी झूठ नही बोलते । ये बातें उन्होंन अपनी माँ से सीखी थी। जानते हो एक बार उन्होंन अपनी माँ को भी सच का पाठ पढाया था। 2 अक्टूबर 1869 को करमचंद गांधी के घर पुत्र का जन्म हुआ था। शिशु का नाम मोहनदास रखा गया। उसकी माँ पुतली बाई मोहन को प्यार से मोनिया कहकर पुकारती थी। मोहन भी अपनी माँ को बहुत चाहता था। माँ की हर बात ध्यान से सुनता और उसे पुरा करने की कोशिश करता । वह सवाल पूछ-पूछ कर माँ को परेशान कर डालता था। मोहन के घाट के पास एक कुआं था। कुएं के चारों और पेङ पौधे लगे हुए थे। कुएं के पास के पेङों पर चढना मना था। मोहन सबकी आँख बचाकर जब तब पेङ पर चढ जाता था। एक दिन उसके बङे भाई ने मोहन को कुएं के पास वाले पेङ पर  चले देखा। उन्होंन मोहन से कहा - " मोहन तुझे पेङ पर चढने को मना किया था। पेङ पर क्यों चढा है? चल नीचे उतरो, नही हम नही उतरेंगे हमें पेङ पर मजा आ रहा है" मोहन बोला। क्रोधित भाई ने मोहन को चांटा मार दिया । रोता हुआ मोहन माँ के पास पहुंचा और भाई की शिकायत करने लगा - " माँ बङे भईया ने हमें चांटा मारा। तुम भईया को डांटो।" 
        माँ काम में उलझी हुई थी। मोहन माँ से भाई को डांटने की बात कहता गया। तंग आकर माँ कह बैठी उसने तुझे मारा है ना? जा तू भी उस मार दे । मेरा पीछा छोङ मोनिया तंग मत कर। 
        आँसू पोंछ कर मोहन ने कहा - " यह तुम क्या कह रही हो माँ? तुम तो कहती हो अपने से बङों का आदर करना चाहिए।  भइया मुझसे बङे है मै॔ कैसे बङे भइया पर हाथ उठा सकता हूँ? हां तुम भइया से बङी हो । तुम उन्हे समझा सकती हो कि वह मुझे ना मारे।
        मोहन की बात सुनकर, माँ को अपनी भूल समझ आ गई। हाथ का काम छोङ माँ ने मोहन को सीने से लिपटा लिया। उनकी आँखों  से खुशी के आँसू बह चले। वह बोली ' तू मेरा राजा बेटा है मोनिया।  आज तूने अपनी माँ की भूल बता दी । हमेशा सच्चाई और ईमानदारी की राह पर चलना मेरे लाल।
                                   केशव खटोङ 
                                     कक्षा - 8

     

चाँद के बारे में अद्भुत बातें

              चाँद के बारे में अद्भुत बातें 
चांद का भार पृथ्वी के भार से  18 गुना कम है ।
☆  वर्ष  1972 में  चाँद पर पहुचने वाले यूजीन आखिरी           अंतरिक्ष यात्री थे। इसके बाद अब तक कोई इंसान चाँद         पर नही गया।
☆  नील के  टीम के सभी अंतरिक्ष यात्रियों का वर्ष 1930          में जन्म हुआ।  ये सभी पायलट थे।
☆  पहला कदम चाँद पर नील ने रखा था। उसके बीस              मिनट बाद उनके दूसरे साथी बज एल्ड्रिन उतरे थे।
☆  जिस यान से नील आर्मस्ट्रांग गये थे उसका नाम ईगल          था।
☆ अब तक कुल मिशन में 33 अंतरिक्ष यात्री चाँद पर गये।       जिनमें 27 यात्री ही चाँद पर पहुँचे 24 ने चाँद का                  चक्कर लगाया । 12  अंतरिक्ष यात्रियों को ही चाँद पर          कदम रखने का मौका मिला।
☆  चाँद की सतह पर लाखों क्रेटर यानी गड्ढे है। साऊथ             पौल बेसिन सबसे बङा क्रेटर है। यह इतना गहरा है कि          पूरा माउंट एवरेस्ट आ सकता है।
            
                                             हरीश 
                                         कक्षा :- 8

वन्य जीवों का महत्व

                  वन्य जीवों का महत्व 

      वन्य जीव प्रकृति और इंसान को जोडने की ऐसी कङी हैं, जो हमारे भविष्य की बङी जरूरत है।

इसलिए जरूरी है वन्य जीव संरक्षण:- वन्यजीव संरक्षण का अर्थ जंगली जानवरों, उनके आवास और पेङों को संरक्षित करने की प्रणाली से से है। ताकि आने वाली नस्लें वन्यजीवों और प्रकृति से वंचित ना हो।
         वन्यजीव, प्रकृति और इंसान को जोडने की ऐसी कोई है, जो हमारे भविष्य की सबसे बङी जरूरत है। जिस तरह इंसानो की जरूरतों ने प्रकृति और वन्यजीवन को नुकसान पहुंचाया है, उससे खतरे की आहट सुनाई देती है। कुछ ऐसे हि विषय है जो वन्यजीव संरक्षण के महत्व को दर्शाता है।

 जैव विविधता का संरक्षण:- मातृ प्रकृति के लिए जरूरी है कि विभिन्न प्रजातियां खाद्य श्रृंखला से जुडी रहे। इसका मतलब है कि एक प्रजाति का विलुप्त होना कई दूसरी प्रजातियों को प्रभावित कर सकता है। लिहाजा किसी भी पर्यावरण या जैव विविधता के खतरे से निपटने के लिए बेहतर है कि वन्यजीव संरक्षण पर ध्यान दिया जाए। 

पर्यावरण पर्यटन को प्रोत्साहन:- वन्यजीव संरक्षण पारिस्थितिकवाद की वृद्धि से भी जुङा है। अफ्रीका इसका सबसे बङा उदहारण है। अफ्रीका वन्यजीव फाउंडेशन का कहना है कि वन्यजीवों का संरक्षण महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां का पर्यटन पर्यावरण आधारित है। पर्यटक इन्हें प्राकृतिक आवास के साथ देखना पसंद करते है।

                                           रमेश कुमार 
                                            कक्षा - 7

कृष्ण वन्दना पूर्णता:

                  कृष्ण वन्दना पूर्णता:
कृष्ण एक तुम ही थे, 
जिसने राधा के दर्द को समझा।
राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए 
पर सीता की पीर को ना समझ पाए।
मीरा की पीर भी किसी न जानी,
वह भी तो थी कृष्ण की दीवानी। 
लक्ष्मण को भाया भाई का साथ, 
उर्वशी की तङप उन्होने कहां जानी।
यदा -  यदा ही धर्मस्य का जब आह्वान हुआ।
द्रौपदी के लिए कृष्ण दौरे आए,
युधिष्ठिर ये बात कहां समझ पाए।
युगों - युगों में नारी अबला ही कहलाई।
कोई नही मिला कृष्ण सा मीत कृष्ण सा भाई,
नारी की भावना जिसने क्षितिज से जानी।
युगों - युगों तक याद रहेगी श्री कृष्ण की वाणी,
नारी सम्मान में उनकी गाथा जो हम सब ने जानी।
 
                                   सलोनी कुमावत 
                                      कक्षा  - 6

पिता

                             पिता

    पिता एक उम्मीद है, एक आस है।
    परिवार की हिम्मत और विश्वास है।
    बाहर से सख्त,  अंदर से नरम है।
    उसके दिल में दफन कई मर्म है।
    पिता संघर्ष की आंधियों में हौसलों की दीवार है।
    परेशानियों से लङने की दोधारी तलवार है।
    बचपन में खुश करने वाला खिलौना है।
    नींद लगे तो पेट पर सुलाने वाला बिछौना है।
    पिता जिम्मेदारियों से लदी गाङी का सारथी है।
    सबको बराबर का हक दिलाता, यही एक महारथी है।
    सपनों को पूरा करने में लगने वाली जान है।
    इसी से तो माँ और बच्चों की पहचान है।

                                    पार्थ राज कटारिया
                                      कक्षा - 8

सामान्य ज्ञान

                         सामान्य ज्ञान 


1.पूर्वी भारत का सबसे बङा किंतु दुरस्ध प्रदेश है -- अरूणाचल प्रदेश 
2. असम को पूर्व का प्रवेश द्वार कहा जाता है।
3. ब्रह्मपुत्र एक नदी ना होकर एक नद् है।
4. अरूणाचल प्रदेश का नाम सूर्य के एक पर्यायवाची पर पङा।
5. मिजोरम कि सबसे ऊँची चोटी का नाम 'फोनपूई' है ( बीला पर्वत) है और जिसकी ऊँचाई 2210 मीटर है।
6. त्रिपुरा प्रदेश लगभग 75 प्रतिशत बांग्लादेश से घिरा हुआ है।
7. भारत मे सबसे पुराना 18 छेदों वाला गोल्फ का मैदान है। जहाँ पूरे विश्व से खिलाडी खेलने आते है। यह स्थान 'शिलांग ' मेघालय में है।
8. कस्तूरी मृग अभ्यारण्य "केदारनाथ" में स्थित है।
9. "सऊदी अरब " देश ने पहली बार एक महिला राजदूत को नियुक्त किया था।
10. जुलाई 20, 1969 को चांद पर पहला मिशन भेजा । जिसका नाम था अपोलो।
11. हैजा, टाईप, क्षयरोग, सर्दी-जुकाम आदि ये वायु , जल एवं भोजन कीटों के सम्पर्क द्वारा फैलते है।
12. रक्त दान के पश्चात 24 घन्टे तक अधिक परिश्रम और व्यायाम नही करना चाहिए। 
13. हर साल चंद्रमा पृथ्वी से 3.82 सेन्टीमीटर दूर हो जाता है।
14.मकङी का खून पारदर्शी होता है।
15. बिल्लियों की औसत आयु 12 से 15 साल होती है।
16. आदमी के शरीर में हर सैकेंड में आठ मिलियन कोशिकाएँ नष्ट होती है और इतनी नई जन्म लेती है।
17. कछुए के दान्त नही होते है।
18. एक कुत्ते में मनुष्य की अपेक्षा सुनने की शक्ति दस गुणा अधिक होती है।
19. एक सफेद सारस की उम्र 82 वर्ष रिकार्ड की गई है।
20. रेफिलिशिया सबसे बङा पुष्प है।
21. औसतन इंसान Keyboard से टाइप करते समय Left Hand का 56 प्रतिशत प्रयोग करता है।
22. बिल्ली के प्रत्येक कान में 32 मांमपेशिया होती है।

                                            समस्त छात्र-छात्रा
                                                कक्षा - 7 व 8

बदलने की क्षमता ही बुद्धिमता की माप है

          बदलने की क्षमता ही बुद्धिमता की माप है

      -- बदलने और बदलाव लाने की क्षमता ही बुद्धिमता का माप है। यह बिल्कुल सत्य है। समय के साथ अच्छे काम के लिए बदलना बहुत जरूरी है और यह ही एक समझदारी है। समय के साथ बहुत सारी चीजें बदल रही है, और बहुत सारे नये आविष्कार हो रहे है।इसलिए सफल होने के लिए हमें भी समय के साथ बदलना चाहिए और नई - नई चीजें और बातों को समझना चाहिए। 

      -- बुद्धिमता यह है कि कोई भी अध्ययन, समझ और सीखने के द्वारा सुधार कर सकता है। बात करे तो हमें अपनी पुरानी सोच को बदलेंगे तभी हम नया सीख पायेंगे। देश आगे बढ पायेगा। और आगे प्रगति होगी।

     -- जिन बातों और सोच में बदलने और अच्छा सीखने को ना मिले तो हमें वह सोच खत्म कर देनी चाहिए। आज भी समाज में बहुत सारी पुरानी बातें है जो लोग मानते है, जैसे लडकियों को स्कूल नही जाने देना, उनकी जल्दी शादी करवा देना, भेद - भाव रखना, जाति - वाद, दहेज प्रथा, यह सब हमें खत्म करने की जरूरत है। इसी पुरानी सोच के कारण हम पीछे है। हम यह सोच बदलेंगे तभी जीवन का खुबसूरत अनुभव होगा। बदलने की क्षमता ही बुद्धिमता का भाव है यह कथन शत- प्रतिशत सत्य है।

      -- परिवर्तन ही संसार का नियम है यह संसार परिवर्तन से ही चलता है परिवर्तन होते होते ही मानव का जन्म हुआ। परिवर्तन से ही हमारे सुन्दर भारत का निर्माण हुआ है। बदलने की क्षमता से तात्पर्य अपने आप को किसी भी परिस्थितियों के अनुकूल बनाने की योग्यता अथवा निपुणता। यह बात काफी हद तक तर्क संगत है की बदलने की क्षमता ही बुद्धिमता का माप है। समझने के लिये आप मानव के विकास के विज्ञान को ले सकते है।

       -- ऐसी क्रियाकलाप, जो कि मानव जाति को करती है और इसका परिणाम बुरा होता है। समय के साथ बहुत सारी चीजें बदल रही है। इसलिए हमें भी बदलना चाहिए। इतने सारे आविष्कार हो रहे है।

      -- "बदलने की क्षमता से तात्पर्य है उठो जागों और तब - तक ना रुको जब - तक आपका लक्ष्य आपको न प्राप्त हो।"
                                           प्रियंका राठौङ
                                              कक्षा - 9

कौन अच्छा कौन बुरा

                   कौन अच्छा कौन बुरा

        दूसरो को परखना हमारी सोच पर निर्भर करता है।
             ये बात महाभारत के समय की है। पांडवों और कौरवों को गुरू द्रोणाचार्य शिक्षा दे रहे थे। एक बार उनके मन में अपने शिष्यों की परीक्षा लेने का विचार आया। उन्होंने अपने शिष्य दुर्योधन को अपने कक्ष में बुलाया और उससे कहा "वत्स एक काम करो, किसी अच्छे आदमी की खोज करो और उसे मेरे पास लेकर आओ" । दुर्योधन कहा "ठीक है आचार्य, मैं अभी ही आश्रम से निकल जाता हूँ और अच्छे आदमी की खोज शुरू कर देता हूँ" दुर्योधन कुछ समय बाद वापस आश्रम लौटकर आया और आचार्य को बताया, "आचार्य मैंने पूरे ध्यान से हर जगह जाकर दूर- दूर तक खोजा लेकिन मुझे एक भी अच्छा आदमी नही मिला जिसे मैं आपके पास ला सकता "। इस पर आचार्य ने कहा " ठीक है, तुम युधिष्ठिर को मेरे पास भेज दो" युधिष्ठिर जब आचार्य के पास आया तो उन्होंने उसे कहा "शिष्य एक काम करो, सबसे बुरे आदमी की खोज करो और उसे मेरे पास लेकर आओ" । युधिष्ठिर "ठीक है आचार्य जाता हूँ "। कुछ दिनों बाद युधिष्ठिर भी बिना किसी को अपने साथ लाए आश्रम लोट आया। आचार्य ने उससे पूछा "शिष्य तुमने कई शहरों का इतने दिनों तक भ्रमण किया और फिर भी तुम एक भी बुरे आदमी को लेकर नही आये"। युधिष्ठिर बोला " जी गुरूजी मुझे किसी भी आदमी में इतनी ज्यादा बुराई नही दिखी कि उसे सबसे बुरा आदमी मानकर आपके पास ला पाता"। इस बात पर बाकि सारे शिष्य बङे हैरान हुए और आचार्य से बोले गुरूजी ऐसा कैसे संभव हो सकता है कि दुर्योधन को एक भी अच्छा आदमी नही मिला युधिष्ठिर को एक भी बुरा आदमी नही मिला" । तब "गुरुजी ने समझाया "शिष्यों जब हम किसी के बारें में देखते हैं तो उसे उस नजरिये से देखते हैं जैसे हम होते है। इसी प्रकार युधिष्ठिर को कोई भी बुरा व्यक्ति नजर नही आया क्योंकि वह स्वंय अच्छा है तो उसे बाकि सब भी अच्छे लगे और कोई बुरा नही लगा"। केवल अपने - अपने नजरिए का फर्क है। तुम जिस व्यक्ति में जो देखना चाहते हो तुम्हे वही दिखेगा । इसी प्रकार आपकी सोच अच्छी होगी तो आपके लिए सब अच्छे होंगे अगर सोच बुरी होगी तो सब बुरे दिखाई देंगे।

                                                 दीपिका मेघवाल 
                                                    कक्षा - 7